कविता-गझल-चारोळी-वात्रटिका
हे तुझे गीत गाताना मी दिसते इतकी सुंदर
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कविता-गझल-चारोळी-वात्रटिका
April 19, 2010
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April 19, 2010
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April 19, 2010
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April 19, 2010
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April 19, 2010
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April 19, 2010
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साहित्य - ललितप्रदीप निफाडकरांची गझल
April 17, 2010
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साहित्य - ललितप्रदीप निफाडकरांची गझल
April 17, 2010
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साहित्य - ललितजगाने उरी जी धरावी गझल
अशी एक मजला सुचावी गझल
मला लोक हे गुणगुणू लागले
कुणी लाख माझी न गावी गझल
—- प्रदीप निफाडकर
April 17, 2010
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साहित्य - ललितप्रदीप निफाडकरांची गझल
April 17, 2010
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साहित्य - ललितप्रदीप निफाडकरांची गझल
April 17, 2010
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