स्वयंभू शंकर (अभंग रचना)

स्वयंभू शंकर। प्रकट स्वरूप।
निरंकार रूप। शिवलिंग।१।।

त्रिशूलधारक। चंद्र माथ्यावर।
रूद्र महेश्वर। दैत्यहारी।।२।।

हातात डमरू। ललाटी त्रिनेत्र।
ओमकार मंत्र। आत्मज्ञान।३।।

शिव हाच वर।मानिला सतीने।
व्रत हे भक्तीने। पूर्णत्वास।।४।।

कैलास भूपती। सृजन वैरागी।
पार्वती अर्धांगी। महादेव।।५।।

बेलपत्र फुले। अभिषेक दुग्ध।
भक्त मंत्रमुग्ध। होत असे।।६।।

श्रावण महिना। मंगल पवित्र।
नमिला सर्वत्र। त्रिपुरारी।।७।।

प्रतिभा चौगले यांच्या प्रतिभास या कवितासंग्रहाच्या इ-पुस्तकातील ही कविता.
हे इ-पुस्तक आपण खालील लिंकवर खरेदी करु शकता.

किंमत : रु.८०/-
सवलत किंमत : रु.५०/-

https://marathibooks.com/books/pratibhas-by-pratibha-chougale/



स्वयंभू शंकर। प्रकट स्वरूप।
निरंकार रूप। शिवलिंग।१।।

त्रिशूलधारक। चंद्र माथ्यावर।
रूद्र महेश्वर। दैत्यहारी।।२।।

हातात डमरू। ललाटी त्रिनेत्र।
ओमकार मंत्र। आत्मज्ञान।३।।

शिव हाच वर।मानिला सतीने।
व्रत हे भक्तीने। पूर्णत्वास।।४।।

कैलास भूपती। सृजन वैरागी।
पार्वती अर्धांगी। महादेव।।५।।

बेलपत्र फुले। अभिषेक दुग्ध।
भक्त मंत्रमुग्ध। होत असे।।६।।

श्रावण महिना। मंगल पवित्र।
नमिला सर्वत्र। त्रिपुरारी।।७।।

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