मनाचे श्लोक – ६१ ते ७०

मनाचे श्लोक – ६१ ते ७०

उभा कल्पवृक्षातळी दुःख वाहे | तया अंतरी सर्वदा तेचि आहे |
जनी सज्जनी वाद हा वाढवावा | पुढे मागुता शोक जीवी धरावा ||61||

निजध्यास तो सर्व तूटोनि गेला | बळे अंतरी शोक संताप ठेला |
सुखानंद आनंद भेदे बुडाला | मनी निश्र्चयो सर्व खेदे उडाला ||62||

घरी कामधेनू पुढे ताक मागे | हरीबोध सांडूनि वेवाद लागे |
करी सार चिंतामणी कांचखडे | तया मागता देत आहे उदंडे ||63||

अती मूढ त्या दृढ बुध्दी असेना | अती काम त्या राम चित्ती वसेना |
अती लोभ त्या क्षोभ होईल जाणा | अती वीषयी सर्वदा दैन्यवाणा ||64||

नको दैन्यवाणे जिणे भक्तीऊणे | अती मूर्ख त्या सर्वदा दुःख दूणे |
धरी रे मना आदरे प्रीति रामी | नको वासना हेमधामी विरामी ||65||

नव्हे सार संसार हा घोर आहे | मना सज्जना सत्य शोधूनि पाहे |
जनी वीष खाता पुढे सूख कैंचे | करी रे मना ध्यान या राघवाचे ||66||

घनश्याम हा राम लावण्यरुपी | महाधीर गंभीर पूर्णप्रतापी |
करी संकटी सेवकाचा कुढावा | प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||67||

बळे आगळा राम कोदंडधारी | महा काळ विक्राळ तोही थरारी |
पुढे मानवा किंकरा कोण केवा | प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||68||

सुखानंदकारी निवारी भयाते | जनी भक्तीभावे भजावे तयाते |
विवेके त्यजावा अनाचार हेवा | फ्ा्रभाते मनी राम ंिचंतीत जावा ||69||

सदा रामनामे वदा पूर्णकामे | कदा बाधिजेना पदा नित्यनेमे |
मदालस्य हा सर्व सोडूनि द्यावा | प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||70||

- श्री रामदासस्वामी लिखित मनाचे श्लोक (क्रमशः)



उभा कल्पवृक्षातळी दुःख वाहे | तया अंतरी सर्वदा तेचि आहे |
जनी सज्जनी वाद हा वाढवावा | पुढे मागुता शोक जीवी धरावा ||61||

निजध्यास तो सर्व तूटोनि गेला | बळे अंतरी शोक संताप ठेला |
सुखानंद आनंद भेदे बुडाला | मनी निश्र्चयो सर्व खेदे उडाला ||62||

घरी कामधेनू पुढे ताक मागे | हरीबोध सांडूनि वेवाद लागे |
करी सार चिंतामणी कांचखडे | तया मागता देत आहे उदंडे ||63||

अती मूढ त्या दृढ बुध्दी असेना | अती काम त्या राम चित्ती वसेना |
अती लोभ त्या क्षोभ होईल जाणा | अती वीषयी सर्वदा दैन्यवाणा ||64||

नको दैन्यवाणे जिणे भक्तीऊणे | अती मूर्ख त्या सर्वदा दुःख दूणे |
धरी रे मना आदरे प्रीति रामी | नको वासना हेमधामी विरामी ||65||

नव्हे सार संसार हा घोर आहे | मना सज्जना सत्य शोधूनि पाहे |
जनी वीष खाता पुढे सूख कैंचे | करी रे मना ध्यान या राघवाचे ||66||

घनश्याम हा राम लावण्यरुपी | महाधीर गंभीर पूर्णप्रतापी |
करी संकटी सेवकाचा कुढावा | प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||67||

बळे आगळा राम कोदंडधारी | महा काळ विक्राळ तोही थरारी |
पुढे मानवा किंकरा कोण केवा | प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||68||

सुखानंदकारी निवारी भयाते | जनी भक्तीभावे भजावे तयाते |
विवेके त्यजावा अनाचार हेवा | फ्ा्रभाते मनी राम ंिचंतीत जावा ||69||

सदा रामनामे वदा पूर्णकामे | कदा बाधिजेना पदा नित्यनेमे |
मदालस्य हा सर्व सोडूनि द्यावा | प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||70||

– श्री रामदासस्वामी लिखित मनाचे श्लोक (क्रमशः)

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