मनाचे श्लोक – १२१ ते १३०

मनाचे श्लोक – १२१ ते १३०

महा भक्त प्रल्हाद हा कष्टवीला | म्हणोनी तयाकारणे सिंह जाला |
न ये ज्वाळ वीशाळ संन्नीध कोणी | नुपेक्षी कदा देव भक्ताभिमानी ||121||

कृपा भाकिता जाहला वज्रपाणी | तयाकारणे वामनु चक्रपाणी |
द्विजाकारणे भार्गवू चापपाणी | नुपेक्षी कदा देव भक्ताभिमानी ||122||

अहिल्ये सतीलागि आरण्यपंथे | कुढावा पुढे देव बंदी तयाते |
बळे सोडिता घाव घाली निशाणी | नुपेक्षी कदा राम दासाभिमानी ||123||

तये दोपदीकारणे लागवेगे | त्वरे धांवतो सर्व सांडूनि मागे |
कळीलागी जाला असे बौध्द मौनी | नुपेक्षी कदा देव भक्ताभिमानी ||124||

अनाथा दिनाकारणे जन्मताहे | कलंकी पुढे देव होणार आहे |
जया वर्णिता शीणली वेदवाणी | नुपेक्षी कदा देव भक्ताभिमानी ||125||

जनाकारणें देव लिलावतारी | बहूतांपरी आदरे वेषधारी |
तया नेणती ते जन पापरूपी | दुरात्मा महानष्ट चांडाळ पापी ||126||

जगी धन्य जो रामसूखे निवाला | कथा ऐकतां सर्व तल्लीन जाला |
देहेभावना रामबोधे उडाली | मनोवासना रामरूपी बुडाली ||127||

मना वासना वासुदेवी वसो दो | मना कामना कामसंगी नसो दे |
मना कल्पना वाउगी ते न कीजे | मना सज्जना सज्जनी वस्ति कीजे ||128||

गती कारणे संगती सज्जनाची | मती पालटे सूमती दुर्जनाची |
रतीनायिकेचा पती नष्ट आहे | म्हणोनी मनातीत ह्ऊोनि राहे ||129||

मना अल्प संकल्प तोही नसावा | सदा सत्य संकल्प चिती वसावा |
जनी जल्प विकल्प तोही त्यजावा | रमाकांत एकांतकाळी भजावा ||130||

- श्री रामदासस्वामी लिखित मनाचे श्लोक (क्रमशः)



महा भक्त प्रल्हाद हा कष्टवीला | म्हणोनी तयाकारणे सिंह जाला |
न ये ज्वाळ वीशाळ संन्नीध कोणी | नुपेक्षी कदा देव भक्ताभिमानी ||121||

कृपा भाकिता जाहला वज्रपाणी | तयाकारणे वामनु चक्रपाणी |
द्विजाकारणे भार्गवू चापपाणी | नुपेक्षी कदा देव भक्ताभिमानी ||122||

अहिल्ये सतीलागि आरण्यपंथे | कुढावा पुढे देव बंदी तयाते |
बळे सोडिता घाव घाली निशाणी | नुपेक्षी कदा राम दासाभिमानी ||123||

तये दोपदीकारणे लागवेगे | त्वरे धांवतो सर्व सांडूनि मागे |
कळीलागी जाला असे बौध्द मौनी | नुपेक्षी कदा देव भक्ताभिमानी ||124||

अनाथा दिनाकारणे जन्मताहे | कलंकी पुढे देव होणार आहे |
जया वर्णिता शीणली वेदवाणी | नुपेक्षी कदा देव भक्ताभिमानी ||125||

जनाकारणें देव लिलावतारी | बहूतांपरी आदरे वेषधारी |
तया नेणती ते जन पापरूपी | दुरात्मा महानष्ट चांडाळ पापी ||126||

जगी धन्य जो रामसूखे निवाला | कथा ऐकतां सर्व तल्लीन जाला |
देहेभावना रामबोधे उडाली | मनोवासना रामरूपी बुडाली ||127||

मना वासना वासुदेवी वसो दो | मना कामना कामसंगी नसो दे |
मना कल्पना वाउगी ते न कीजे | मना सज्जना सज्जनी वस्ति कीजे ||128||

गती कारणे संगती सज्जनाची | मती पालटे सूमती दुर्जनाची |
रतीनायिकेचा पती नष्ट आहे | म्हणोनी मनातीत ह्ऊोनि राहे ||129||

मना अल्प संकल्प तोही नसावा | सदा सत्य संकल्प चिती वसावा |
जनी जल्प विकल्प तोही त्यजावा | रमाकांत एकांतकाळी भजावा ||130||

– श्री रामदासस्वामी लिखित मनाचे श्लोक (क्रमशः)

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