पत्थर हो, गर्जना धडकुनी मागे फिरते
कविता-गझल-चारोळी-वात्रटिका

पत्थर हो, गर्जना धडकुनी मागे फिरते

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गझल; जाती: समजाती-पद्मावर्तनी-अनलज्वालाl मात्रा: ८+८+८=२४मात्रा