मत्स्यायदान

श्रावण आता संपला. गणपतीही येऊन गेले. आता मत्स्यप्रेमींच्या मेजवान्या सुरु होतील…



आता मत्स्यात्मके देवे | येणे खाद्ययज्ञे तोषावे |
तळोनी मज द्यावे | मत्स्यायदान हे ||

जे कर्लीचा काटा चुकवो | तया मासळी रोजी पावो |
कोळिणी परस्परे भांडो | गिऱ्हाईकांसाठी ||

बोंबील रोजी मिळो | चिंबोरी स्वधर्म नांगी मारो
जो जे वांछील तो ते खाओ | मत्स्यजात ||

वर्षतू सर्वत्र मासळी | सत्वर रेसिपी मांदेली |
अनवरत मालवणी | भेटतू मसाला ||

चला पाहुया बाजार | ताज्या माशांचे आगर |
फडफडते डोंगर | झिंग्यांचिए ||

हलवे जे अलांच्छन | बांगडे जे कापहीन |
ते सदाही सर्वभक्षण | सुर्मयी हेतू ||

किंबहुना पापलेट | फ्राय करा वा रसलिप्त |
भोजनी अखंडित | असो द्यावे ||

आणि सुकी मासळी | हंगामात पावसाळी |
डब्यातून थोडी थोडी | काढावी जी ||

येथ म्हणे श्रीमछिंद्ररावो | भूतमात्र आकंठ खावो |
भरपेट आडवा होवो | समाधिस्तसा ||

— `मराठी पदार्थ’ या WhastApp ग्रुपवरुन

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